Tuesday, September 21, 2010

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  2. पिछले अरसे बाद ऐसा हुआ है कि किसी फिल्म के प्रोमो ने मुझमें इतनी दिलचस्पी जगाई है कि मैं उसका पहले दिन का पहला शो देखने के लिए बेताब हूं. मुझे इस बात का अनुमान नहीं है कि फिल्म अच्छी होगी या बुरी. संभावना तो यही है कि फिल्म चलताऊ ही होगी. हाल ही में इस तरह की दो फिल्में आई थीं और वे दोनों भी ऐसी ही थीं. यह अलग बात है कि उन फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर खूब पैसे बटोरे.



    उनमें से एक आमिर खान की फिल्म थी, जिसके बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन के बाद आमिर ने मार्केटिंग के महारथी का रुतबा हासिल कर लिया. इसकी एक वजह यह भी रही कि आमिर ने शाहरुख खान की सल्तनत में सेंध लगा दी थी. शाहरुख खान ‘रब ने बना दी जोड़ी’ जैसी फिल्म में अपने जाने-पहचाने रंग-ढंग के साथ मौजूद थे, लेकिन इस फिल्म के प्रदर्शन के महज दो हफ्तों बाद रिलीज हुई आमिर की फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया. देखते ही देखते सभी का ध्यान सुरिंदर साहनी से हटकर संजय सिंघानिया पर केंद्रित हो गया. मेरी नजर में दोनों ही फिल्में सामान्य थीं, लेकिन आमिर की फिल्म बहुत बड़ी हिट हो गई. साथ ही इसने बॉलीवुड को कामयाबी का एक नया मंत्र भी दे दिया- खूनखराबे से भरा ‘तमिल तड़का’.

    इसकी सफलता के बाद इसी शैली की एक और फिल्म आई, लेकिन वह तमिल के बजाय तेलुगू मूल की थी- वांटेड. आप इससे बुरी किसी दूसरी फिल्म की कल्पना नहीं कर सकते. कमजोर कहानी, ढीली बुनावट, बिना किसी कुशलता के एक साथ नत्थी कर दिए गए अलग-अलग बिखरे हुए हिस्से. इसके बावजूद अगर इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी के झंडे गाड़ दिए तो उसकी वजह थे सलमान खान. सलमान अपने चिर-परिचित अंदाज में परदे पर आए थे और उनका यही जादू काम कर गया. स्क्रीन पर सलमान का होना ही काफी होता है.

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